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भारतीयों की मुस्लिम विरोधी पोस्ट से अरब देशों में नाराजगी, राजकुमारी ने तो चेतावनी भी दे दी

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कोरोना वायरस से जूझ रहे दुनियाभर के तमाम देशों का इस वक्त बुरा हाल है महामारी के लिए दवाई दिए जाने को लेकर एक तरफ तो भारत की जमकर तारीफ़ हो रही है तो वहीं मुस्लिम विरोधी पोस्ट को लेकर आलोचना भी की जा रही है। दिल्ली के निजामुद्दिन मरकज में तबलीगी जमात के कार्यक्रम के दौरान शामिल हुए लोगों में कोरोना वायरस के होने के बाद भारत में संक्रमण के मामलों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हो गयी है। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर जमात के साथ ही पूरे मुस्लिम समुदाय को जिम्मेदार ठहराया जाने लगा और उनके खिलाफ पोस्ट डाले जाने लगे।

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अब यूएई में सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कुछ भारतीयों की नफरत फैलाने वाली पोस्ट को लेकर असहज स्थिति पैदा हो गई है। और वहां इसकी तीखी आलोचना भी शुरू हो गयी है। तीन दिन पहले यूएई की राजकुमारी ने प्रवासी भारतीयों को सख्त चेतावनी भी दे डाली। यूएई की राजकुमारी हेंद अल कासिमी ने एक भारतीय यूजर की मुस्लिम विरोधी पोस्ट के स्क्रीनशॉट्स शेयर करते हुए लिखा, इस्लामोफोबिया और नस्लवादी गतिविधियों में लिप्त लोगों पर कड़ा जुर्माना लगाया जाएगा और उन्हें यूएई से बाहर निकाल दिया जाएगा। इस चेतावनी के बाद भारतीय यूजर ने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया है।

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राजकुमारी ने साथ ही यह भी जोड़ा कि यहां पर आने वाले हर शख्स को काम के बदले पैसे मिलते हैं, कोई भी मुफ्त में यहां नहीं आता है। इस देश की धरती से आप अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं, अगर आप इसी का मजाक उड़ाते हैं तो ये मत सोचिए कि किसी का ध्यान नहीं जाएगा। इस तनावपूर्ण घटनाक्रम के बीच, भारतीय राजदूत ने भी सोमवार को वहां रह रहे भारतीयों को सावधान किया है। यूएई में भारतीय राजूदत पवन कपूर ने कहा कि भारतीय किसी भी धर्म को आहत करने वाली पोस्ट ना करें। धार्मिक आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारतीय राजदूत ने कहा, भारत और यूएई की धर्म या किसी अन्य आधार पर भेदभाव करने की नीति नहीं रही है।

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आपको बता दें विदेशों में रहने वाले प्रवासियों के मामले में भारत पहले स्थान पर है। कुल 1.659 करोड़ भारतीयों में से आधे से अधिक खाड़ी देशों में ही रहते हैं। दुनिया के हर हिस्से में भारतीय लोगों की मौजूदगी है। लेकिन मध्य पूर्व देशों में सबसे ज्यादा भारत के लोग रहते हैं। इसके पीछे रोजगार से जुड़े कारण हैं। देश के तमाम हिस्सों से इन क्षेत्रों में लोग रोजगार की तलाश में जाते हैं. अरब मुल्कों में सबसे ज्यादा भारतीय लोग यूएई (34 लाख 20 हज़ार) में रहते हैं। उसके बाद सऊदी अरब (25 लाख 94 हज़ार), कतर में (7 लाख 56 हज़ार), ओमान में (7 लाख 79 हज़ार) और बहरीन में (3 लाख 23 हज़ार) रहते हैं।

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गौरतलब है कि यूएई के साथ ही अरब देशो में में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं और भारत के इन सभी देशों के साथ अच्छे संबंध भी हैं। यहां तक कि कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने को लेकर इस्लामिक देश होने के बाद भी यूएई ने इस मामले में हस्तक्षेप न करते हुए इसे भारत का आंतरिक मामला बताया था। लेकिन अब कुछ लोगों की नासमझी और इस्लामोफोबिया के कारण भारत के साथ उसके सम्बन्ध ख़राब होने की कगार पर पहुँच रहे हैं। कुछ दिन पहले खुद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ऐसे लोगों को आगाह करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की थी और कहा था कि कोरोना हमला करने से पहले धर्म, जाति, रंग, भाषा और सीमाएं नहीं देखता है इसलिए हम सभी को मिलकर और भाईचारे के साथ रहना होगा।

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