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उत्तराखंड के इस पहाड़ी जिले में पहली बार दिखा बाघ, वैज्ञानिकों में ख़ुशी का माहौल

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देश मे बाघों की जनसंख्या में दुसरे नंबर पर उत्तराखंड के लिए हिमालयी  क्षेत्र  से एक अच्छी  खबर है। अब उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र  में भी बाघों का दीदार होने लगा है। टिहरी जनपद के उच्च हिमालयी एरिया खतलिंग ग्लेश्यिर (12139 फीट) के आसपास लगे  कैमरा ट्रैप मे बाघ की उपस्थिति का पता चला है।  बाघ की उच्च हिमालयी क्षेत्र  मे होने की खबर से बन्य जीव प्रेमियों मे ख़ासा उत्साह है।  प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) डीवीएस खाती ने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रो मे बाघों की उपस्थिति उत्तराखंड राज्य के लिए एक अच्छी खबर हैं। पिछली गणना के अनुसार राज्य मे बाघों की कुल संख्या 361 थी, जो इस बार 400 के पार जा सकती है।

टिहरी जनपद के खतलिंग ग्लेश्यिर से 27 किलोमीटर दूर खरसोली क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी कैमरा ट्रैप में कैद हुई हैं। वन्य जीव विशेषज्ञों की माने  तो इस ऊचाई वाले क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी पहली बार सामने आई है। डीवीएस खाती जी के अनुसार भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्लूआइआइ) ने पिछले वर्ष ही यहाँ 40 कैमरे लगाए गए थे। उन्होंने बताया की इसके अलावा दो अन्य स्थानों केदारनाथ वन प्रभाग और पिथौरागढ़ की अस्कोट सेंचुरी में भी कैमरे लगाये गए थे और वहा भी बाघों की गतिविधियां का पता चला है।

भारतीय वन्य जीव संस्थान के शोधकर्ता नितिन भूषण जी ने बताया कि उत्तराखंड राज्य में अधिकाँश बाघ मैदानी इलाकों में ही रहते हैं। अभी तक यह कार्बेट नेशनल पार्क के साथ राजाजी पार्क और इनसे लगे वन प्रभागों तक ही सिमित थे। वह बताते हैं कि अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हिमालयी क्षेत्र में बाघ पहले से ही रहते यही या मैदानों से पहाडो की और आ रहे हैं। इसका पता लगाने के लिए जंगल के विभिन्न  जगहों पर कैमरे लगाने की जरूरत है ताकि बाघों की गतिविधियां पर निगरानी रखी जा सखे। इस साल उत्तराखंड में फरवरी से बाघों की गणना शुरू की जाएगीं। इन दिनों वन्य अफसरों और कार्मिकों को इस गणना का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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