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अब उत्तराखंड में बनेगा डिफेंस पार्क, तैयार होंगे आधुनिक हथियार, तैयारियों में जुटा प्रशासन

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उत्तराखंड अब भारतीय सेना की रक्षा तैयारियों और राज्य को सैन्य उपकरणों का हब बनाने के लिए तैयारी कर रहा है। उत्तराखंड राज्य औद्योगिक विकास निगम (सिडकुल) को देहरादून में डिफेंस पार्क बनाने के लिए जगह तलाशने का जिम्मा सौंपा गया है। सिडकुल की यह तलाश जल्द पूरी होने की उम्मीद की जा रही है। उत्तराखंड सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम राज्य है। प्रदेश की सीमा जहाँ एक ओर चीन से लगी हुई है तो दूसरी तरफ नेपाल से। यहां सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं पर पहले से ही काम भी चल रहा है, इसी कड़ी में अब देहरादून में डिफेंस पार्क बनाने की तैयारी की गयी है।

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उत्तराखंड सैन्य गतिविधियों व सैन्य अवस्थापना के विकास का केंद्र बनने जा रहा है। सीमांत जिले चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में वायुसेना एयर डिफेंस राडार व एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के लिए जमीन तलाश रही है। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और एयर मार्शल के बीच इसे लेकर वार्ता भी हो चुकी है। उनसे पहले बीआरओ के आला अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से सीमांत सड़कों के अधिग्रहण और पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए मुलाकात की थी। जाहिर तौर पर सीमा पर चीन की हरकतों के बाद से सेना के लिए उत्तराखंड सामरिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। भारत-चीन सीमा पर सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने के बाद कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो गया है। सीमा पर चीन की हरकतों के बाद उत्तराखंड में सेना, आईटीबीपी और वायु सेना अलर्ट मोड पर है।

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राज्य सरकार यहां सैन्य उपकरणों का उत्पादन शुरू करने जा रही है। इसके लिए डिफेंस उद्यम पॉलिसी बनाई जा चुकी है और अब उद्यमियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पॉलिसी को लागू कर दिया गया है। राज्य के कुछ उद्यमियों ने इसमें रुचि दिखाई है भारतीय सेना की रक्षा तैयारियों में इस्तेमाल होने वाला साजो-सामान बनेगा।  एसोसिएशन से जुड़े कारोबारी अनिल गोयल कहते हैं, केंद्र सरकार ने 100 से अधिक रक्षा उपकरणों को दूसरे मुल्कों से खरीदने के बजाय देश में ही बनाने का फैसला किया है। उत्तराखंड इसका लाभ उठा सकता है। रक्षा उपकरणों की ऐसी दो सूचियां और आनी हैं। इस कारोबार में काफी संभावनाएं हैं और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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