Home उत्तराखंड इन अलौकिक शक्तिओ की वजह से कहा जाता है माँ धारी देवी...

इन अलौकिक शक्तिओ की वजह से कहा जाता है माँ धारी देवी को उत्तराखण्ड की रक्षक और पालनहार

138
0

श्रीनगर से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर कलियासौड़ में अलकनन्दा नदी के किनारे सिद्धपीठ माँ धारी देवी का मंदिर स्थित है। इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। वर्ष 1807 से ही इसके यहां होने का साक्ष्य मिलते है। जबकि पुजारियों और स्थानीय लोगों का मानना है कि धारी मां का मंदिर इससे भी पुराना है। मान्यता अनुसार मां धारी उत्तराखंड के चारधाम की रक्षा करती है। इस देवी को पहाड़ों और तीर्थयात्रियों की रक्षक देवी माना जाता है। मंदिर में मूर्ति जागृत और साक्षात है। यह सिद्धपीठ श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र है। ऐसी मान्यता है की यहां मां काली प्रतिदिन तीन रूप प्रात: काल कन्या, दोपहर युवती और शाम को वृद्धा का रूप धारण करती हैं। कालीमठ भारत में 108 शक्तिस्थलों में से एक है।

यह भी पढ़ें: उत्तराखण्ड का रहस्यमयी मंदिर ..लोग कहते हैं कि यहां नागराज और उनकी मणि मौजूद हैं

धार्मिक परंपरा के अनुसार कालीमठ एक ऐसी जगह है जहां देवी काली ने रक्तबीज राक्षस को मार डाला था और उसके बाद देवी पृथ्वी के नीचे चली गई थी। मंदिर में भक्त बड़ी संख्या में पूरे वर्ष मां के दर्शन के लिए आते रहते हैं। धारी देवी मंदिर में मनाए जाने वाले कई त्योहार है उनमें से, दुर्गा पूजा व नवरात्री में विशेष पूजा मंदिर में आयोजित की जाती है, ये त्योहार यहां का महत्वपूर्ण त्योहार हैं। मंदिर में आपको अनेकों घंटियां दिखेंगी। घंटियों से ध्वनी सुनकर भक्तगण मंत्रमुग्ध हो उठते हैं और माता के जयकारे लगाते हुए मां के दर्शन का लाभ प्राप्त करते हैं। बद्रीनाथ जाते समय भक्त यहां रुककर माता के दर्शन करते हैं। श्रीनगर में स्थित इस धारी देवी मंदिर में माता का केवल सर स्थापित है , मान्यता है कि मां का शरीर रुद्रप्रयाग जिले के कालीमठ में स्थित है।

यह भी पढ़ें: रुद्रप्रयाग: हैलो… मैं पीपल के पेड़ के नीचे हनुमान मंदिर के पास खड़ा हूँ

सिद्धपीठ धारी देवी में जो श्रद्धालु सच्चे मन से मन्नत मांगते हैं मां धारी देवी उसे पूर्ण करती है। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु पुन: यहां आकर घंटी और श्रीफल श्रद्धा से चढ़ाते हैं। पूर्व में यहां मनोकामना पूर्ण होने पर यहां पशुबलि प्रथा थी। पौराणिक धारणा है कि एक बार भयंकर बाढ़ में पूरा मंदिर बह गया था लेकिन एक चट्टान से सटी मां धारी देवी की प्रतिमा, धारो नाम के गांव में बची रह गई थी। इसके बाद गावं वालों को मां धारी देवी की ईश्वरीय आवाज सुनाई दी जिसमें मां की प्रतिमा को वहीं स्थापित करने का आदेश दिया गया था। कहते हैं धारी मां के आशीर्वाद से हर मनोकामना पूरी होती है और सभी दुख मिट जाते हैं।

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड का एक ऐसा मंदिर जहां सिर्फ चिट्टी लिखकर होती है मुरादें पूरी…

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here