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चमोली के प्रदीप कुंवर का शानदार काम, तीन साल में ही तैयार किया चंदन का वन

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वो कहते हैं न कि अगर आप किसी चीज को अच्छी सोच और मेहनत से करते हैं तो आपको उस काम में सफतला अवश्य मिलती है। अब ऐसा ही एक कारनाम चमोली के रहने वाले प्रदीप कुंवर ने कर दिखाया है। जिन्होंने नामुमकिन से लगने वाले काम को मुमकिन कर दिखाया है। प्रदीप कुंवर ने अपने खेतों में चंदन का जंगल तैयार कर लिया है। जी हां, वही चंदन जो आमतौर पर दक्षिण भारत में पाया जाता है। इसके उत्तराखंड के पहाड़ में पनपने की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था।चमोली जिले के कर्णप्रयाग ब्लॉक स्थित ग्राम ग्वाड़ तोक निवासी एक युवक ने अपनी जमीन पर परंपरागत खेती से हटकर चंदन का जंगल उगाने की योजना बनाई तो ग्रामीणों ने उसका खूब मजाक उड़ाया।

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लेकिन यह युवक भी अलग ही मिट्टी का बना हुआ था। उसने ग्रामीणों की परवाह न करते हुए  चंदन का जंगल लगाने में जुट गया। आखिरकार मेहनत रंग लाई और तीन साल में सफेद चंदन का जंगल लहलहाने लगा है। आज वही ग्रामीण, जो युवक का मजाक उड़ाया करते थे उसे उसके काम की शाबासी दे रहे हैं। प्रदीप कुंवर पहाड़ के शिक्षित युवा हैं, एमए  बीएड कर चुके हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सरकारी नौकरियों के लिए कई टेस्ट दिए, लेकिन सफल नहीं हुए। तब प्रदीप ने स्वरोजगार करने की ठानी और आज उनकी मेहनत की पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है। लेकिन, परंपरागत खेती के अलावा उन्हें कोई राह नजर नहीं आई। जबकि, परंपरागत खेती को जंगली जानवर तो नुकसान पहुंचाते ही हैं, सिंचाई की व्यवस्था न होने के कारण लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।

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ऐसे में एक दिन अचानक प्रदीप के मन में ख्याल आया कि क्यों न चंदन का जंगल लगाया जाए। प्रदीप को मालूम हुआ कि बदरी-केदार में हर साल चंदन की भारी खपत होती है। लेकिन, इसे कर्नाटक से मंगाना पड़ता है। प्रदीप ने जब परिवार के सामने यह बात रखी तो किसी ने भी इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। बावजूद इसके अपनी सोच को कार्यान्वित करने के लिए प्रदीप ने वर्ष 2017 में भिकियासैंण (अल्मोड़ा) स्थित नर्सरी चंदन की पौध खरीदकर उसे खेतों में लगाना शुरू कर दिया। आज खेतों में लहलहा रहे 12 फीट ऊंचे सफेद चंदन के 40 पेड़ उनकी मेहनत की गवाही दे रहे हैं। यही नहीं पेड़ों में बीज आने भी शुरू हो गए हैं और अब वह बीज से नर्सरी तैयार करने में जुटे हैं।

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