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बीमार पत्नी का नहीं देखा गया दर्द, पति ने किया ऐसा काम, मिला नेशनल अवॉर्ड

अक्सर देखा जाता है कि सुख के समय में दूर के रिश्तेदार भी अपने हो जाते है लेकिन जब इंसान के ऊपर मुसीबत आती है अपने ही दूर हो जाते है। ऐसे में परायों से क्या उम्मीद करें। लेकिन दुख में सिर्फ पति-पत्नी ही एक दूसरे का साथ निभाते है। हाल ही में ऐसा ही एक मामला देखने को मिला। आज हम तमिलनाडु के एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे है जिसने अपनी बीमार पत्नी की देखभाल के लिए एक ऐसी चीज की ईजाद कर दी जिसकी हर तरफ चर्चा है। जब उसको अपनी पत्नी का ये दर्द नहीं देखा गया तो उसने पत्नी के लिए कुछ करने की ठान ली। इसके बाद उसने ऐसा काम किया इसके बाद उसको इस काम के लिए नेशनल इनोवेशन इनाम भी मिला है।

दरअसल, लोहे का काम करने वाले 42 वर्षीय एक मजदूर ने अपनी बीमार पत्नी के लिए उसके बिस्तर को और आरामदायक बनाने के लिए बेहद सूझबूझ वाला आविष्कार किया है। एस सरावना मुथु की पत्नी के शरीर का ऑपरेशन हुआ है और वह पिछले दो महीनों से बेड रेस्ट पर है। इस दौरान उसे बिस्तर पर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उसे उठकर वॉशरुम जाने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। अपनी पत्नी का ये दर्द सरावना से देखा नहीं गया और फिर उसने पत्नी के लिए कुछ करने की ठान ली। उसने एक रिमोट कंट्रोल टॉयलेट बेड बना डाली। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए मुथु ने बताया कि उसे बेड रेस्ट पर रहने वाले मरीजों की पीड़ा समझ आ रही थी कि वे कैसे हर चीज के लिए दूसरों के ऊपर निर्भर रहते हैं। उन्होंने कहा कि यहां तक कि उनकी देखभाल करने वालों को भी परेशानी होती है। कई मामलों में से तो मरीज की प्राइवेसी भी खतरे में पड़ जाती है। मरीजों की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए और उनकी परेशानियों को कम करने के लिए मुथु ने रिमोट कंट्रोल बेड बनाने का फैसला किया। मुथु ने इस नए रिमोट कंट्रोल बेड में फ्लश टैंक, सेप्टिक टैंक से लैस एक रिमोट कंट्रोल बेड बनाया है। रिमोट कंट्रोल बेड में तीन बटन होंगे।

एक बटन से बेड को ओपन करने में मदद मिलेगी जबकि दूसरे बटन से क्लोजेट को ओपन करने में मदद मिलेगी जबकि तीसरे बटन से टॉयलेट फ्लश करने में मदद मिलेगी। मुथु ने बताया कि इसे बनाने में शुरुआती दौर में उसे काफी दिक्कतें आई लेकिन उसने उम्मीदों नहीं खोई। यहां तक कि मुथु ने इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम से भी उनके निधन से पहले बात की थी। कलाम ने ही उसे इस आविष्कार को करने के लिए प्रेरित किया था और आज उसने नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन का खिताब जीता। मुथु ने एक साल के अंदर इस आविष्कार को पूरा कर दिखाया। मुथु को इसके लिए 15 मार्च को गुजरात में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों ये अवार्ड मिला।


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