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कालापानी पर और ज्यादा तानातानी, नेपाल के प्रधानमंत्री को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का ये जवाब

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इन दिनों भारत और नेपाल के बीच उत्तराखंड में स्थित कालापानी के कारण विवाद बढ़ता जा रहा है। इतिहास में ऐसा पहली बार है जब इस तरह से यहाँ विवाद सामने आया है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पिछले दिनों कहा था कि भारत को कालापानी इलाके से अपने सैनिकों को वापस बुलाने चाहिये। उन्होंने कहा, नक्शा कोई भी छाप लेता है। बात इसमें सुधार की नहीं, अतिक्रमण की है। नेपाल दूसरों की जमीन पर एक इंच अतिक्रमण नहीं करेगा और अपने क्षेत्र का एक इंच हिस्सा दूसरों को नहीं देगा।

हम भारतीय सुरक्षाबलों को कालापानी से हटाएंगे। नेपाल की जमीन पर नेपाली सेना रहेगी। आपको बता दें 31 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के नए केंद्रशासित प्रदेश के रूप में गठन के बाद भारत सरकार ने देश का जो नया नक्शा जारी किया है। इसमें उत्तराखंड के कालापानी और लिपुलेख को भारतीय क्षेत्र में दिखाए जाने पर नेपाल ने एतराज जताया है। उसके बाद ही विवाद की यह स्थिति बनी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नेपाल सरकार ने छह नवंबर को कालापानी को भारतीय नक्शे में शामिल किए जाने पर आपत्ति जता दी थी। विवाद और ज्यादा बढ़ गया जब ओली ने कहा, नेपाल अपने कब्जे वाले क्षेत्र से विदेशी सैनिकों को हटाने में सक्षम है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस समस्या का हल आपसी बातचीत से निकाला जा सकता है।

इस पूरे मामले पर अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चुप्पी तोड़ी है और कहा कि कुमाऊं के कालापानी इलाका भारत के हिस्से ही रहेगा। कालापानी को लेकर नेपाल की जो प्रतिक्रिया आ रही है, वह उसकी संस्कृति से मेल नहीं खाती है। नेपाल, भारत का मित्र राष्ट्र है। उम्मीद है कि यह मसला बातचीत से सुलझा लिया जाएगा।

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