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2 अप्रैल विशेष: धोनी का वो छक्का जो हर क्रिकेटप्रेमी के दिल में अपनी अमिट छाप छोड़ चुका है

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कोरोना संकट के इस दौर में अधिकतर लोग आज ये बात भूल चुके हैं कि आज का ही दिन था जब साल 2011 में भारत ने श्रीलंका को हराकर 28 साल का सूखा ख़त्म किया था। वो खुबसूरत लम्हा पूरे देश के क्रिकेटप्रेमियों के दिलों में हमेशा के लिए कैद हो चुका था। फाइनल में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की पारी की शुरुआत ज्यादा अच्छी नहीं रही और पहला विकेट सिर्फ 17 रन पर उपुल थरंगा के रूप में गिर गया जिन्होंने 20 गेंदों का सामना करते हुए महज 2 रन बनाए और जहीर खान की गेंद पर आउट हुए थे।

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इसके बाद जरूर दूसरे विकेट के लिए 60 रनों की भागीदारी हुई लेकिन टीम की स्थिति में सुधार तब आया जब माहेला जयवर्धने क्रीज पर आए तो पानी थोड़ी और नाबाद 103 रनों की पारी खेली। इसके चलते टीम ने 50 ओवर में 6 विकेट पर 274 रन बनाए। गेंदबाजी में भारत की तरफ से जहीर खान और युवराज सिंह ने दो-दो विकेट लिए जबकि हरभजन सिंह ने 50 रन देकर एक विकेट प्राप्त किया।

275 रनों का पीछा करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत भी वैसे ही रही जैसी श्रीलंका की रही थी क्योंकि वीरेंद्र सहवाग ओवर की दूसरी ही गेंद पर बिना कोई रन बनाए आउट हो गए। इसके अलावा सचिन तेंदुलकर भी फ्लॉप हुए लेकिन गौतम गंभीर और विराट कोहली के बीच थोड़ी बहुत अच्छी भागीदारी हुई मैच में वापसी की। इसके बाद जब कोहली के आउट होने पर कप्तान धोनी आये और अपने अंदाज में बल्लेबाजी कर्ज हुए भारत को 6 विकेट से जीत दिला दी थी। जिस विजयी छक्के से कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ये जीत दिलाई थी वो छक्का हमेशा के लिए खेलप्रेमियों के दिलों में अपनी जगह बना चुका है। एक इंटरव्यू में दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी कहा था कि मरने से पहले में धोनी द्वारा लगाया गया वो छक्का देखना पसंद करूँगा।

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इस विश्वकप की ख़ास बातें ये थे कि यह क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का आखिरी विश्वकप था और उन्होंने इस पूरी सीरिज में दमदार प्रदर्शन भी किया था। इसके अलावा जिस बात के लिए यह वर्ल्ड कप हमेशा के लिए याद रह जाता है वह ये है कि कैंसर जैसी बीमारी से लड़ते हुए और खून की उल्टियों के बीच जिस तरह का प्रदर्शन युवराज सिंह ने इस दौरान किया था और अपने जोरदार ऑलराउंडर खेल की बदौलत युवराज सिंह को इस वोल्ड कप का मैंन ऑफ़ द सीरिज का खिताब भी मिला था।

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