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उत्तराखंड: कई रोपवे परियोजनाओं को मिली हरी झंडी… 25 मिनट में पहुंचेंगे सोनप्रयाग से केदारनाथ

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देवभूमि उत्तराखंड में राज्य वन्यजीव बोर्ड ने केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और चंडी देवी रोपवे को हरी झंडी दे दी है। अब यह प्रस्ताव नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इनके बनने से श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई वन्यजीव बोर्ड बैठक में इन तीन समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। तीर्थाटन व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तराखंड में रोपवे परियोजनाओं को लेकर सरकार गंभीरता से कदम बढ़ा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में सोनप्रयाग से केदारनाथ, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब और हरिद्वार में हरकी पैड़ी से चंडी देवी तक रोपवे परियोजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई। बैठक में अन्य कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए केदारनाथ के लिए प्रस्तावित रोपवे की लंबाई 11.5 किमी है। इसका निर्माण होने पर यह विश्व के सबसे लंबे रोपवे में शामिल हो जाएगा। इससे सोनप्रयाग से केदारनाथ तक की दूरी 25 मिनट में तय हो सकेगी। सचिवालय के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में हुई बोर्ड की 17वीं बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि वन, वन्यजीव व प्रकृति का संरक्षण आवश्यक है तो राज्य का विकास भी। ऐसे में हमें आर्थिकी व पारिस्थितिकी में सामंजस्य बनाकर चलना होगा।

इस रोपवे में गौरीकुंड, चीड़बासा, लिंचौली तीन स्टेशन भी पड़ेंगे। इसके जद में केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग की लगभग 26.43 हेक्टेयर वनभूमि आ रही है। इसके साथ ही हेमकुंड रोपवे में फूलों की घाटी का लगभग 27.4 हेक्टेयर भूमि आ रही है। बोर्ड ने रोपवे के लिए यह वन भूमि हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही चंडीदेवी मंदिर के लिए प्रस्तावित रोप वे निर्माण में राजाजी पार्क की लगभग .29 हेक्टयर जमीन आ रही है। यह रोपवे दीनदयाल उपाध्याय पार्क (हरकी पैड़ी के समीप) से बनना है। इनके बनने से खासकर केदारनाथ और हेमकुंड जाने वाले श्रद्धालुओं को जहां राहत मिलेगी, वही संख्या में भी खासा इजाफा होगा।



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