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स्वतंत्रता दिवस: उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्ण सिंह रावत को जाबांजी के लिए शौर्य चक्र

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जम्मू-कश्मीर में आतंक विरोधी अभियानों में अदम्य साहस दिखाने वाले भारतीय सेना के चार जांबाजों को इस बार शौर्य पदक दिया जाएगा। इनमें वायु सेना के विंग कमांडर विशक नायर और सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्ण सिंह रावत, मेजर अनिल उर्स और हवलदार आलोक कुमार दुबे शामिल हैं। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सेना के लिए वीरता पदकों को स्वीकृति दी है। इसके साथ ही सेना के 31 जवानों को इस बार वीरता पदक भी मिलेगा।

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शौर्य चक्र विजेताओं में उत्तराखंड के कृष्ण सिंह रावत भी शामिल हैं। जिनके नाम की घोषणा के बाद पूरे उत्तराखंड के लोगों को गर्व की अनुभूति हो रही है। लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्ण सिंह रावत नियंत्रण रेखा पर आतंकियों के घुसपैठ को रोकने के लिए टीम लीडर के रूप में तैनात थे। घुसपैठ की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने सभी रास्तों पर सैनिक तैनात किए। करीब 36 घंटे बाद नियंत्रण रेखा के पास उनकी टीम ने आतंकवादियों के समूह को देखा था। इसके बाद उनकी टीम ने घुसपैठ रोकने की कोशिश की और 2 आतंकियों को मार गिराया, जबकि एक को गंभीर रूप से घायल भी कर दिया था।

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लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्ण सिंह रावत का जन्म 25 मार्च 1985 को अल्मोड़ा जिले के भिकियासैन में हुआ था। उनके पिता नई दिल्ली में स्टॉफ ऑफ एंटीग्रेटेड डिफेंस हेड क्वार्ट्स में एंटीग्रेटेड फाइनेंसियल एडवाइजर के निजी सचिव के पद से रिटायर हैं। कृष्ण ने अपनी स्कूलिंग नई दिल्ली के सरोजनी नगर स्थित ग्रीन फील्ड्स स्कूल और नवयुग स्कूल से की। कमीशनिंग पर वह पहली बटालियन पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल) में शामिल हो गए. उन्हें 2010 में सेना पदक (वीरता) और मेंशन-इन-डिस्पैच में यूनिट में काउंटर के साथ तैनात किया गया।

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शौर्य चक्र किसे दिया जाता है

  • सेना में किसी भी रैंक के ऑफिसर (महिला/पुरुष), नेवी, एयरफोर्स, किसी भी रिजर्व फोर्स, प्रादेशिक सेना, नागरिक सेना और कानूनी रूप से गठित अन्य सैनिक।
  • सशस्त्र बलों की नर्सिंग सेवाओं के मेंबर।
  • समाज के हर क्षेत्र के सभी जेंडर के सिविलियन नागरिक समेत पुलिस फोर्स, सेंट्रल पैरा-मिलिट्री फोर्सेस, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स

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