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चीन से गलवां घाटी झड़प में घायल हो गए थे देवभूमि के बिशन सिंह, अब आयी शहादत की खबर

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बात 15-16 जून की है जब भारत और चीन की सेना के बीच झड़प हुई थी जिसमें भारत के एक कर्नल समेत 20 सैनिक मारे गए थे और क़रीब 76 घायल हुए थे. और वहीँ इस दौरान चीन के भी 40 जवानों की मौत की खबर आयी थी जबकि उसके भी कई जवान घायल हो गए थे। इससे छह सप्ताह पहले आमने-सामने आने के बाद तनाव कम की प्रक्रिया में लगे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़कर सामने आ गया था। 1962 के चीनी मानचित्र में उसकी सीमा श्योक नदी तक जाती है जो कि आज भारत के लिए विवादित क्षेत्र है. हालांकि, भारत ने गलवान घाटी को हमेशा ऐसे क्षेत्र के रूप में देखा है, जहां वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पैंगोंग सो की तरह विवादित नहीं रही है।

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भारतीय सैन्य सूत्रों ने कहा था कि गलवान में चीनी सैनिकों का निर्माण अप्रत्याशित था क्योंकि यह आमतौर पर पीएलए के लिए कंगीश्वर और जैदुल्ला में अपने पारंपरिक आधार पर अभ्यास करने का मौसम था। संघर्ष में भारत के करीब ढाई सौ और चीन के एक हजार से अधिक जवान थे। गलवान घाटी की नदी में करीब फुट गहरे बेहद ठंडे पानी में यह संघर्ष चलता रहा। जहां यह संघर्ष हुआ उस नदी के किनारे मात्र एक आदमी को ही निकलने की जगह थी इसलिए भारतीय सैनिकों को संभलने में भारी परेशानी हुई। चीनी सेना ने कांटे लगे डंडों से हमला किया। लद्दाख में ग्लेशियर होने के कारण वहां हथियारों का उपयोग नहीं होता और लाठी-डंडों और के साथ ही पेट्रोलिंग होती है।

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अब इस कड़ी में गलवान घाटी में घायल हुए उत्तराखंड के एक जवान की शहादत हो गयी है। 43 वर्षीय शहीद बिशन सिंह मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी में बंगापानी के रहने वाले थे। शहीद बिशन सिंह गलवां घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में घायल हुए थे। सात आठ दिन तक एमएच लेह में उनका इलाज चला था। इसके बाद वे दोबारा ड्यूटी पर चले गए थे।  दोबारा गलवां घाटी पहुंचने के बाद उनकी हालत फिर बिगड़ गई। उन्हें इलाज के लिए चंडीगड़ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। लेकिन इलाज के दौरान जवान की जान चली गई। शहीद बिशन सिंह 31 अगस्त 2020 को सेवानिवृत्त होने वाले थे। शहीद बिशन सिंह अपने पीछे पत्नी सती देवी 40 वर्ष, पुत्र मनोज 19 वर्ष और पुत्री मनीषा 16 वर्ष को छोड़ गए हैं।

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