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उत्तराखंड: लंपी बीमारी की दस्तक, 35 पशुओं की हो चुकी मौत, अलर्ट हुआ जारी

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अफ्रीकन फ्लू के बाद उत्तराखंड में लंपी वायरस ने दस्तक दे दी है. लंपी वायरस की वजह से उत्तराखंड में कई भैसों की मौत हो चुकी है। वहीं हरिद्वार जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों में भी गाय-भैसों के अंदर लंपी वायरस मिला है, जिससे लोग काफी डरे हुए हैं. हरिद्वार का बहादराबाद इलाका लंपी वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां लंपी वायरस के करीब 1000 मामले मिल चुके हैं, जिसकी वजह से 325 से ज्यादा गाय-भैसों की मौत हो चुकी है। हरिद्वार में जिस तरह से लंपी वायरस के मामले बढ़ रहे हैं, उसने पशुपालन विभाग की भी चिंता बढ़ा दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग की तरफ से 3,0000 वैक्सीनेशन मंगाने के आदेश दे दिए गए हैं, जिसमें से 16000 उधमसिंह नगर और 14000 हरिद्वार जिले में वैक्सीन भेजी जाएगी।

बुधवार को पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बैठक बुलाकर सभी जिलों के मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को रोकथाम व बचाव के लिए कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। पशुपालन निदेशक डॉ. प्रेम कुमार ने भी हरिद्वार जिले में रोग से प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया।हरिद्वार जिले में गाय व भैंस में लंपी बीमारी तेजी से फैल रही है। यहां अब तक 35 पशुओं की इस बीमारी से मौत हुई है। 454 से अधिक पशुओं का 26 कैंपों के माध्यम से इलाज किया गया है। बीमार पशुओं के इलाज के लिए 30 हजार गोट पॉक्स वैक्सीन हरिद्वार जिले को उपलब्ध कराई गई हैं। हालांकि अन्य किसी जिले में ऐसा कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है। पशुपालन विभाग ने अब सभी जिलों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

लंपी बीमारी की बात करें तो ये एक संक्रामक रोग है. लंपी की चपेट में आने वाले मवेशियों को बुखार आता है. मवेशी के पूरे शरीर में गांठ, नरम छाले पड़ जाते हैं. मुंह से लार निकलती है और आंख-नाक से भी स्राव होता है. पशु चिकित्सकों के मुताबिक, दूध उत्पादन में कमी आना, मवेशी का ठीक से भोजन नहीं कर पाना भी इस बीमारी के लक्षण हैं. गढ़वाल मंडल में इस बीमारी के फैलने के बाद अब कुमाऊं मंडल में भी पशुपालन विभाग ने अलर्ट जारी किया है. सभी डॉक्टरों को निर्देशित किया गया है कि जिन भी पशुओं में यह लक्षण दिखे तुरंत उसका उपचार और वैक्सीनेशन करे.

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