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जानिए पहाड़ के युवा कपिल की कहानी, सभी उत्तराखंडियों को पढ़ना बहुत जरूरी ये नहीं पड़ा तो कुछ नहीं पड़ा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान उत्तराखंड में आकर कहा था पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी कभी उसके काम नहीं आती लेकिन एक युवा ने उनकी इस बात को झुटला दिया है और आज लाखों उत्तराखंडियों के लिए प्रेरणा का कारण बना हुआ है। हम यहाँ बात कर रहे हैं जिला रुद्रप्रयाग के ग्राम सभा टेमरिया-डमार के रहने वाले कपिल शर्मा ने, जो अभी हैं मात्र 26 साल के और इस 26 साल की युवा अवस्था में ही उन्होंने ऐसे कार्य कर दिए हैं जिसके लिए आम आदमी को दूसरा जनम लेना पड़े।

पहाड़ में ये एक आम धारणा है की जहाँ 12वीं कक्षा पूरी हुई, बस उसके बाद अपना बोरिया बिस्तर बांधो और निकल जाओ रोजगार के लिए दिल्ली, मुंबई जेसे महानगरों में रोजगार की खोज के लिए, पर कपिल की सोच कुछ अलग थी वो अपने गाँव में ही रहकर कुछ ऐसा करना चाहते थे कि जिससे यहीं रोजगार हो और लोग उन्हें देखकर वापस फिर अपने पहाड़ों की ओर लोटें, राजकीय इंटर कॉलेज भीरी से 12वीं करने के बाद जब उनके सारे साथी उन्हें छोड़कर बाहर शहरों की ओर जा रहे थे तो वहीँ कपिल ने गाँव में ही रहने का निश्चय किया, और उन्होंने कृषि में व्यवसाय शुरू करने का निश्चय किया, सबसे पहले तो उन्हें अपने घर से ही कड़े विरोध का सामना करना पड़ा क्यूंकि उनके घर वाले इस काम के लिए तैयार नहीं थे, जैसे तैसे उन्होंने अपने घर वालों को इस बात के लिए राजी किया।

आज से लगभग 5 साल पहले उन्होंने अपना कृषि का काम शुरू कर दिया, और उन्हें उस समय इन सभी चीजों का कोई अनुभव भी नहीं था जिसके कारण शुरू के दो साल तो खेतों में इतना भी उत्पादन नहीं हुआ की वो उनसे नए बीज खरीद सकें, आमदनी होना तो दूर की बात है, इस दौरान उनके घरवाले, गांववाले और बाकी लोग उन्हें तरह तरह के ताने देते रहे पर कपिल ने हिम्मत नहीं हारी और वो कृषि से सम्बंधित नयी नयी जानकारियां लेकर कार्य करते रहे, और अब पिछले तीन साल से उनका व्यवसाय सरपट दौड़ता जा रहा है।

इस दौरान उन्होंने अपने पहाड़ में पैदा की जा सकने वाली और भी बहुत सारी चीजों की जानकारी एकत्रित की और कपिल शर्मा यहाँ सब्जियों के खेती के साथ साथ और भी बहुत सारे व्यवसाय शुरू कर चुके हैं। अब हर साल कपिल अपने खेतों में फूलों की खेती भी शुरू कर चुके हैं जिनकी पूरे छेत्र में बहुत मांग रहती है, यहाँ तक कि उनके द्वारा उगाये गये फूलों की डिमांड केदारनाथ मंदिर में भी रहती है और अब हर साल वो वहां भी अपने फूल पहुंचाते है। इसके अलावा कपिल ने अपने खेतों में डेरी व्यवसाय भी शुरू कर दिया है, वहां उन्होंने सबसे पहले गौशाला का निर्माण किया और अब वहां 2 देशी गाय रखी गयी हैं जो प्रतिदिन 20 लीटर से भी अधिक दूध देती हैं। इसके अलावा भी इस पहाड़ी नौजवान ने अपने फ़ार्म में मत्स्य पालन भी पिछले साल से शुरू कर दिया है अब इस काम से भी कपिल की अच्छी खासी आमदनी हो जाती है, और अब वो खुद को ऑर्गेनिक खेती की ओर भी ले जा रहे हैं। इन सब के अलावा भी कपिल अपने क्षेत्र में नवयुवकों को खेती से जुड़ने के लिए लगातार प्रशिक्षण देते आ रहे है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने पहाड़ों की तरफ वापस लौटें।

अगर 3 साल पहले की बात करैं तो जहाँ कपिल सालाना 3 लाख कमा रहे थे तो पिछले 2 साल पहले उनका व्यवसाय 3 लाख से बढकर 5 लाख हो गया था और अगर बात पिछले साल की हो तो वो 7 लाख से उपर जा चुका है और उन्होंने अब इस बार 10 लाख का टारगेट अपने लिए रखा है। इसके साथ साथ पूरे उत्तराखंड के लोग भी उनके इन सारे कार्यों से काफी प्रभावित हो रहे हैं, इसी कड़ी में रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी श्री मंगेश घिल्डियाल जी भी पिछले दिनों उनके फ़ार्म में गये थे और उनके इन सभी कार्यों से काफी प्रभावित नजर आये और उन्होने कपिल शर्मा को ऐसे ही आगे बड़ने को कहा। तो पूरा उत्तराखंड सलाम करता है युवा कपिल शर्मा के इस जज्बे को और उम्मीद करता है कि आने वाले समय बाकी बाकी लोग भी इस काम से जुड़ेंगे और जिससे पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम आ सके।

नीचे देखिये उनके फ़ार्म से कुछ तस्वीरें—

 



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