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देवभूमि का वह जिला जहां 38 वीर सैनिक ले चुके हैं कीर्ति व शौर्च चक्र सहित कई सम्मान

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उत्तराखंड को वीरों की भूमि यूं ही नहीं कहा जाता। राज्य का सैन्य इतिहास वीरता और पराक्रम के असंख्य किस्से खुद में समेटे हुए है। यहां के लोकगीतों में शूरवीरों की जिस वीर गाथाओं का जिक्र मिलता है, वे अब प्रदेश की सीमाओं में ही न सिमट कर देश-विदेश में फैल गई हैं। भारत माता की सीमाओं की रक्षा के लिए 51 वीर जवान अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं, जिसमें तीन जवान कारगिल युद्ध में भी शहीद हुए थे। भारतीय सेना ने रुद्रप्रयाग जिले के 38 वीर सैनिकों को कीर्ति व शौर्च चक्र सहित अन्य सम्मान से नवाजा है।

केदारघाटी, क्यूंजा घाटी, मंदकिनी घाटी, मद्महेश्वर व तुंगनाथ घाटी सहित रानीगढ़, धनपुर, बच्छणस्यूं और तल्लानागपुर को संजोए रुद्रप्रयाग जनपद के प्रत्येक गांव का भारतीय सेना से सीधा संबंध है। यहां के कम से कम 15 फीसदी परिवारों का एक-एक सदस्य सेना से जुड़ा हुआ है। अगस्त्यमुनि ब्लाक का कंडारा व जाखणी सहित अन्य क्षेत्रों के कई गांव सैनिक बाहुल्य हैं। कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनकी तीन पीढिय़ा सेना से जुड़ी हुई हैं। देश के लिए मर-मिटने का जज्बा लिए ये जवान सीमाओं पर मुस्तैद हैं। वर्ष 1962 का चीन युद्ध हो चाहे, वर्ष 1965 व 1971 का पाक युद्ध या फिर वर्ष 1999 का कारगिल युद्ध, जनपद के रणवांकुरों ने अपना लोहा मनवाया है।

लेकिन आज भी कई सैनिकों के गांवों को मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो पाई हैं। कारगिल युद्ध में शहीद हुए बेंजी-कांडई के सुनील दत्त कांडपाल के गांव के लिए की गई घोषणाएं फाइलों में कैद हो गई हैं। क्यूंजा के भगवान सिंह हो चाहे देवर गांव के गोंविद सिंह के गांव के लोगों को भी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।

वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध में धनपुर पट्टी के पीड़ा गांव के रायफल मैन वीर सिंह को अदम्य साहस के लिए सेना ने 24 सितंबर 1962 को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया। वहीं, वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध में अपने पराक्रम का लोहा मनवाने वाले सारी गांव के हवलदार जय सिंह और बज्यूण गांव के सूबेदार सुजान सिंह को वीर चक्र से नवाजा गया। इसके अलावा 29 जवानों को सेना मेडिल और 6 जवानों को मेन-इन-डिश से नवाजा जा चुका है।

जिंदा रहने के मौसम बहुत मगर, जान देने की ऋतु रोज आती नहीं…हिंदी फिल्म ‘हकीकत’ के गीत की ये पक्तियां देश पर मर-मिटने वाले जनपद रुद्रप्रयाग के वीर रणवांकुरों के शौर्य और पराक्रम को बयां करती हैं।

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